बेचैन मन
प्रेषक:अनाम (एक बेचैन मन)
दिनांक: 6 अप्रैल 2026
प्राप्तकर्ता:प्रिय स्वयं (मेरा मन)
विषय: दिल की अनकही बात
प्रिय
मन,आज पहली बार तुझसे ही बात करने बैठी हूँ। अक्सर सबको समझाने में लगी रही , पर तुझे समझने का समय ही नहीं दिया।तू चुप रहता है, फिर भी बहुत कुछ कहता है। तेरी खामोशियों में छुपे सवाल मुझे अक्सर बेचैन कर देते हैं। कभी तू खुशियों में झूमता है, तो कभी बिना वजह उदास हो जाता है।
सच कहूँ तो, मैं तुझे अब तक ठीक से जान ही नहीं पाई।कभी-कभी अकेलापन महसूस होता है, तो कभी भविष्य को लेकर चिंता होती है। ऐसा लगता है कि जिम्मेदारियाँ बढ़ती जा रही हैं और हम खुद को कहीं पीछे छोड़ते जा रहे हैं।
फिर सोचती हूँ कि हर कठिनाई हमें कुछ नया सिखाने के लिए ही आती है।क्यों हर छोटी बात दिल पर ले लेता है तू? क्यों दूसरों की उम्मीदों में खुद को भूल जाता है? शायद इसलिए कि तू सच्चा है, और सच्चाई अक्सर संवेदनशील होती है।
आज एक वादा करती हूँ—अब तुझे अनदेखा नहीं करूँगी। तेरी हर खुशी और हर दर्द को समझने की कोशिश करूँगी। दुनिया चाहे कुछ भी कहे, अब मैं तेरे साथ खड़ी रहूंगी ।
आज मैं तुमसे एक वादा करना चाहती हूँ—मैं फिर से कोशिश करूंगी। धीरे-धीरे सही, लेकिन तुम्हारी ओर कदम जरूर बढ़ाऊँगी। अब मैं दूसरों की नहीं, अपने मन की सुनूँगी।बस तुम भी मेरा साथ मत छोड़ना।क्योंकि तुम ही तो मेरी असली पहचान हो।
चल, आज से हम दोस्त बनते हैं—तू और मैं।शायद इसी में सुकून मिल जाए।
तुम्हारा अपना
एक अधूरा पर उम्मीद से भरी इंसान
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र
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