जिंदगी

कभी ख़्वाबों की बारिश है,
कभी मौसम उदासी का,
यही तो खेल है ,
हर रोज़ इस कच्ची-सी ज़िंदगी का।

कभी यह हँसकर दुलार देती,
कभी चुपके से कसौटी पर कसती,
हर मोड़ पर एक नया सबक,
हर कदम पर एक नई दस्तक।

कभी सपनों की पतंग उड़ाती,
कभी आँधियों का डर भी दिखाती,
धूप की तपिश जुझलातीं ,
तो कभी छाँव की ठंडी पगड़ी पहनाती।

ज़िंदगी का दस्तूर बड़ा सरल है—चलते रहो, 
थमना नहीं,
गिरो तो उठकर फिर बढ़ो,
क्योंकि रुकना ही हार है।

हिम्मत की एक चिंगारी लेकर ,
जिंदगी से दोस्ती का हाथ मिला ले,
 जो मिला है उसे संवारें,
जो नहीं मिला उसे  सोचकर ,
आज को ना मिटाए ।

डॉ रुपाली

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