नारी शक्ति

नारी है शक्ति, नारी है स्वर,

उसके बिना अधूरा हर पर्व।

त्याग, ममता, साहस की धारा,

वह है जीवन की आधारशिला सारा।


घर की लक्ष्मी, देश की शान,

हर क्षेत्र में बढ़ा रही मान।


शक्ति, साहस, प्रेम का संगम,

नारी है प्रगति का आलम।


नारी शक्ति का है ये पर्व,

सम्मानित हो उसका हर गर्व।


ज्ञान, कला और वीरता की मूरत,

समाज को दे रही नई सूरत।


घर–परिवार से लेकर संसार,

नारी करती सबका उद्धार।


नारी शक्ति का उत्सव मनाएँ,

सम्मान और समानता फैलाएँ।


डॉ रुपाली गर्ग नारी स्वर 

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