देवी और नारी
देवी हैं जगत में शक्ति की मूरत,
अंधेरों में उजाला, हर संकट की डोर।
उनकी भक्ति में है शक्ति और ज्ञान,
नारी में वही छवि, सजीव जीवन उसका मान।
नारी है माता, बहन, बेटी और साथी,
सहनशीलता में गहरी, साहस में बड़ी।
जो विपत्ति में भी न हारें, न थकें,
जीवन के हर मोड़ पर उजाला बिखेरें।
देवी की भक्ति में है ममता का सागर,
नारी की मेहनत में है साहस का पर्वत।
नारी वही है, जो जीवन को सजाए,
देवी की तरह शक्ति, जग में मान बढ़ाए।
सृष्टि के हर रूप में नारी है विद्यमान,
देवी की तरह, साहस और ज्ञान का ज्ञान।
देवी और नारी, दो रूप हैं महान,
ममता और शक्ति का अद्भुत मान।
जहाँ नारी है वहाँ जीवन खिलता,
जहाँ देवी है वहाँ जगत उज्जवलित रहता।
डॉ रुपाली गर्ग नारी स्वर
मुंबई महाराष्ट्र
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