धुआं

धुआँ-धुआँ सा जीवन क्यूँ है,

साँसों में विष का सेवन क्यूँ है?

सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू जाल,

जिनसे मिटता जीवन का हाल।

हर कश में हैं रोग हज़ार,

फेफड़े होते चूर-चूर बारंबार।

दिल की धड़कन मंद हो जाती,

कैंसर चुपके से घर बनाती।

माँ की गोदी सूनी होती,

बच्चों की हँसी भी रोती।

धुएँ में क्या रखा है भाई?

छोड़ इसे, ये मौत सच्ची आई।

जो खुद पीते, वो भी मरते,

जो पास रहें, वो भी झुलसते।

परिवार, समाज, देश का नुक़सान,

धूम्रपान है सबसे बड़ा तूफ़ान।



डॉ रुपाली गर्ग

मुंबई महाराष्ट्र 

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