एक दिन
एक दिन ही क्यों डॉक्टर को याद किया जाता है,
जो हर दिन दर्द में उम्मीद सजाता है।
जो साँसों की डोर को थामे खड़ा है,
हर ज़ख्म पे मरहम सा बड़ा है।
ना त्यौहार, ना कोई रविवार,
उसके लिए हर दिन है तैयार।
रातों को नींद से करता किनारा,
मरीज की जान बने उसका सहारा।
फिर क्यों एक दिन ही सम्मान देते हो,
बाकी दिनों में क्यों चुप रहते हो?
क्या सेवा का ये समर्पण कम है,
जो हर सांस पर उनका करम है।
डॉक्टर कोई एक दिवस की बात नहीं,
वो तो हर लम्हा जीती हुई सौगात कहीं।
हर धड़कन में उसकी मेहनत बसती है,
हर इलाज में ममता सी हँसती है।
चलो आज से हर दिन मनाएं,
डॉक्टर को दिल से धन्यवाद कह जाएं।
क्योंकि एक दिन नहीं, हर दिन उनका है,
हर जीवन की कहानी में, नाम उन्हीं का हैं।
रुपाली
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