प्रेम

प्रेम कोई शब्द नहीं होता,

यह तो मौन में गूंजता है,

बिना कहे सब कुछ कह जाए,

ऐसा भाव बस प्रेम में होता है।

तेरी हँसी जब दिखे मुझे,

तो फूलों सी महक उठे सुबह,

तेरे बिना दिन भी अधूरा लगे,

तेरे संग हर पल में हो रूह बहक।

न छू सकूँ तुझे फिर भी,

हर सांस में तेरा नाम है,

प्रेम वो दीपक है जो,

जलता बिना किसी शाम है।

ये रिश्ता ना बंधन मांगता,

ना कोई शर्तें रखता है,

बस मन से मन का जुड़ जाना,

यही सच्चा प्रेम कहलाता है।

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