विरह की वेदना
विरह की वेदना
विरह की वेदना का मतलब...
ग़मों का सागर में जिसने गोते लगाए वो ही जाने।
मिल गये जिन्दगी भर के लिये ग़म...
आंसू की क्या औकात जो कर दे इसको कम।
ग़मों में भी ये मुस्कराने की वजह खोज लेता है...
जब बातों बातों में जिक्र विरह का होता है।
बचपन में सुनी कहानी सबने...
राक्षस की जान थी किसी के वश में।
तड़पा, बेचैन हुआ दिल उस तोते का...
जिसकी जान थी उसकी सांसों में।
रोया उसका दिल बार-बार...
ग़मों की सफेद चादर ने किया उसको बेकरार।
है साथ उसकी अनगिनत निशानी...
कई बार दिल ने सुनी ये अपनी जुबानी।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र
Comments
Post a Comment