मुस्कान

दीप दयालुता का जगाओ,
क्यों दिलों में ठंडक छाई,
क्यों रिश्तों में दूरी आई,
थोड़ा सा अपनापन बाँटो,
थोड़ी सी गर्मी फैलाओ,
दीप दयालुता का जगाओ,
किसी के आँसू पोंछो जाकर,
थोड़ी सी मुस्कान दे जाओ,
जो गिरा पड़ा है राहों में,
उसको सहारा दे आओ।

कड़वाहट को प्रेम से धो दो,
अहंकार को दिल से हटाओ,
मन में करुणा का सागर भर दो,
दीप दयालुता का जगाओ,
नफ़रत की आँधी थम जाएगी,
जब प्रेम की लौ जल जाएगी,
हर हृदय बने मंदिर जैसा,
जहाँ मानवता खिल जाएगी,
हर दिल में दया की जोत जले,
दीप दयालुता का जगाओ।


डॉ रुपाली गर्ग 
मुंबई महाराष्ट्र

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