हर तालिका तीज

वन की गहराई में बैठी, तप की अग्नि जलाती,

पार्वती माँ शिव को पाने, तन-मन अर्पण करती।


ना भोजन, ना जल ग्रहण, बस नाम शिव का जप,

हर श्वास में बसा हुआ था, उनका ही संकल्प।


सखियाँ संग दिलासा देतीं, करतीं मधुर संवाद,

पर भक्ति में डूबी नारी का, अडिग रहा विश्वास।


शिव से जुड़ा हर विचार, हर धड़कन का गीत,

प्रेम की अनोखी मिसाल, पार्वती का नीत।


नारी का ये तप बताता है, प्रेम नहीं है क्षीण,

भक्ति और विश्वास से मिलता, जीवन का वरदानी क्षीर।


आज भी हरतालिका तीज पर, नारी करती प्रणाम,

सुहाग और स्नेह का पर्व है, शिव-पार्वती का धाम।


डॉ रुपाली गर्ग नारी स्वर

मुंबई महाराष्ट्र 

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